Incest हाय रे ज़ालिम................

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सुबह ७ बजे।

रत्ना सुबह सुबह ऑगन साफ़ कर रही थी और ममता अभी अभी नहाके बाथरूम से निकली थी और सुबह के धूप में अपने लम्बे घने बाल सुखा रही थी।
उसके जिस्म पे टॉवल लिपटी हुई थी।

रत्ना;अरे ममता ज़रा अपने भैया को जागा दे पता नहीं कहाँ रहने लगा है ये लड़का इतनी देर हो गई अभी तक नहीं उठा। जा तो ज़रा....

ममता ; कमर हिलाते हुए देवा के कमरे में चले जाती है।
भाई उठो सुबह हो गई उठो न भैया।
वो देवा का कन्धा हिला हिला के उसे जगाने की नाकाम कोशिश करने लगती है।

पर देवा टस से मस नहीं होता उसपे तो रात की खुमारी छाई थी।

लंड पायजामे में खड़ा हुआ था और सामने खड़ी ममता के चेहरे की तरफ निशाना लिए हुये था।

ममता की नज़र जैसे ही देवा के लंड पे पडती है उसका मुंह खुला का खुला रह जाता है।

वो सोचने लगती है ये पायजामे के अंदर से इतना ख़ौफ़नाक लग रहा है तो बाप रे बाप.....

वो एक बार फिर से देवा को जगाने के लिए उसकी छाती पे हाथ रखती है और जैसे ही वो अपना नाज़ुक हाथ देवा के घुंगराले बाल वाली छाती पे रखती है।

देवा नींद में उसका हाथ पकड़ के उसे अपने ऊपर खीच लेता है उसे तो खवाब में शालु की बेटी रश्मि नज़र आ रही थी।

ममता के मुंह से यही निकलता है माँ।

देवा;पुरी ताकत से ममता को अपने बाहों में समेट लेता है।

ममत को आज पहली बार किसी ने इस तरह पकड़ा था भले ही वो उसका सगा भाई था पर एक मरद का एहसाह उसे अंदर तक रौंगटे खड़े करने के लिए काफी था।

वो धीमी आवाज़ में कहती है।
भाई उठ जाओ न मै हूँ ममता।

देवा आँखें खोलता है और ममता को इस तरह अपने से चिपका देख फ़ौरन उसे अपने ऊपर हटा देता है।


देवा- तू यहाँ क्या कर रही है।

ममता; वो मै मै वो .....अरे माँ ने तुम्हे उठाने के लिए कहा है और तुम हो की पता नहीं कैसे कैसे खवाब देखते हो मुझे भी वो चुप हो जाती है।

देवा;उसे कुछ बोलने ही वाला था की रत्ना भागते हुए कमरे के अंदर आती है।

रत्ना;देवा जल्दी उठ तेरे दोस्त पप्पू के बापु की तबियत बहुत ख़राब है पप्पू तुझे लेने आया है चल जल्दी कर।

देवा;झट से बिस्तर छोड देता है और मुंह हाथ धोके पप्पू के साथ उसके घर चला जाता है।

शालु का शराबी पति रात में शराब के नशे में एक गढे में गिर गया था जिसके वजह से उसे काफी मार भी लगा था सर से खून बहने से वो थोड़े थोड़े देर बाद होश में आता और फिर से बेहोश हो जाता।

पास में नीलम और रश्मि बैठी रो रही थी।

शालु; किसी तरह खुद को संभाले हुए थी।

देवा;ज़्यादा पढ़ा लिखा नहीं था पर उसे पता था की इस वक़्त शालु के पति को वैध की ज़रुरत है।

वो शालु से कहता है हमे वैध जी को यहाँ लाना होगा।

पप्पू;देवा को साथ चलने के लिए कहता है पर शालु उसे घर रुक के बापू का ख्याल रखने को कहती है और खुद देवा के साथ ट्रेक्टर में बैठ के वैध के घर चली जाती है।

वैध का घर कुछ किलोमीटर दूर था।

देवा;तूफ़ान के रफ़्तार से वैध के घर पहुँच जाता है।
वो दरवाज़ा खटखटाता है पर अंदर से कोई आवाज़ कोई हलचल सुनायई नहीं देती।

वैध एक ६० साल का आदमी था उसका एक बेटा था जो फ़ौज में था पत्नी उसकी इस दुनिया में थी नहीं अपनी बहु के साथ वो यहाँ रहता था।
वैध की बहु किरण एक 30 साल की औरत थी देवा ने उसे आज तक कभी देखा नहीं था।


जब शालु और देवा को वैध और उसकी बहु कही नज़र नहीं आते तो देवा शालु को एक जगह बैठाके घर के पिछवाडे जाके देखता है।

वैध के घर के पीछे एक छोटी सी झोपडी बनी हुई थी।
जहां वैध के मवेशी।(एनिमल) बँधे हुए थे।

देवा;को कुछ खुश फुश की आवाज़ सुनाई देती है।

वो चुपचाप उस झोंपडे के खिडकी के पास चला जाता है ये सोच के की हो सकता है यहाँ कोई मिल जाए।

पर वो जैसे ही खिडकी के पास पहुंचता है एकदम हैरत में पड़ जाता है।
अंदर का नज़ारा दिल दहला देने वाला था।

वैध हरी किशन अपनी जवान बहु किरण के साथ एक दम नंगा उस झोपडे में खड़ा था।



किरण;अपने ससुर हरी किशन के छोटे से लंड को हाथ में लेके हिला रही थी दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे।

देवा;कुछ बोलने की हालत में नहीं था उसे अपने ऑखों पे यक़ीन नहीं हो रहा था की भला एक ३० साल की औरत एक ६० साल के बूढ़े के लंड को हाथ में ले के ऐसे क्यों खड़ी है और वो कोई और नहीं बल्कि किरण का ससुर था।

किरण;बापू ये तो खड़ा ही नहीं हो रहा।

हरि किशन;बहु मुंह में ले के चूस शायद कुछ हो जाए।

किरण;नहीं नहीं सुबह सुबह ये सब मुझसे नहीं होंगा।
कितने लोगों का इलाज करते हो अपने इसका इलाज क्यों नहीं करते एक तो बेटे को फ़ौज में भेज दिया है आपने । मेरी तो कोई परवाह ही नहीं है ना आपको और आपके बेटे को।

हरि किशन;अरे बहु दिल छोटा मत कर । गोपाल अगले महिने कुछ दिनों के लिए तो आ ही रहा है न।

किरण;तब तक मै क्या करूँ।

हरि किशन;मैं तेरी सहला देता हूँ तू कहे तो चाट लूँ।


तभी देवा बोल पड़ता है।
देवा;वैध जी पहले मेरे साथ घर चलिये।
WOW SASUR BAHU KA NYA ROLE
 
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देवा की जानदार आवाज़ सुनके किरण और हरी किशन डर जाते है ।
और जैसे ही उन दोनों की नज़र खिडकी के पास खड़े देवा पे पडती है।

दोनो की आँखें फटी की फटी रह जाती है।

किरण;अपने कपडे उठाके घर में भाग जाती है और हरी किशन अपने धोती ढूँढ़ने लग जाता है।

देवा;दरवाज़े के पास आ जाता है जहाँ शालु परेशान बैठी हुई थी।

शालु;वैध जी मिले क्या।

देवा;हाँ मिल गए काकी। आने ही वाले है यहाँ।

कुछ देर बाद हरी किशन धोती कुर्ता पहन के आँगन में आ जाता है उसका चेहरा पीला पड़ा हुआ था और हाथ पैर थर थर काँप रहे थे।

शालु;अरे वैध जी आप ठीक तो है न।

हरि किशन;हाँ हाँ मै बिलकुल हूँ बोलो कैसे आना हुआ।

शालु;वैध को सब बताती है और उसे साथ चलने के लिए कहती है।

बैध नखरे करना जैसे ही शुरू करता है देवा अपने लंड पे हाथ लगा के उसे आँखों आँखों में कुछ कहता है और वैध चलने के लिए फ़ौरन तैयार हो जाता है।

वो अंदर जा के एक छोटा सा बैग लेके आता है और ट्रेक्टर में आके बैठ जाता है।

देवा;जब ट्रेक्टर शुरू करता है तो उससे दरवाज़े से किरण झाँकते हुए दिखाई देती है।

देवा;उसे देख के मुस्कुरा देता है और किरण भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाती।

कच मं बाद देवा वैध को लीके शालु के घर पहुँचता ह।

हरि किशन;अच्छे से शालु के पति को देखता है
इन्हें कुछ लेप लगाने पडेंगे। पर

देवा;पर क्या।

हरि किशन;पर लेप के सामग्री तो मै घर पे भूल आया हु।

देवा;कोई बात नहीं आप कौन कौन सा सामान लाना है मुझे लिख के दे दिजिये मै आपके घर से ले आता हूँ।
हरि किशन देवा को सामान का नाम लिख के दे देता है।


देवा;मेरे आने तक आप इनका अच्छे से ख्याल रखेंगे आप समझ रहें है ना मै क्या कहना चाहता हूँ।

बैध; हाँ हाँ तुम बिलकुल चिंता मत करो।
गांव में वैध की बहुत इज़्ज़त की जाती है वो भगवन सामान होता है।
इसीलिए हरी किशन बहुत बुरी तरह डर गया था क्यों की अगर देवा अपना मुंह खोल देता तो वैध का गांव निकाला हो जाता।

देवा;वैध के घर पहुँच के दरवाज़ा खटखटाता है।

किरण दरवाज़ा खोलती है और सामने देवा को देख शर्मा जाती है।
आप यहाँ....

देवा;उसके हाथ में वो चिट पकडाते हुए ये कुछ सामान है जो आपके बूढ़े ससुर ने लाने को कहा है ज़रा जल्दी करिये मुझे वापस भी जाना है।

करण;घर के अंदर देवा को बुला लेती है और उसे एक चारपाई पे बैठा के सामान निकालने लगती है।

पुरा सामान निकाल के वो देवा के हाथ में पकड़ा देती है।

देवा;ठीक है मै चलता हूँ।

किरण;और कुछ कहा बापू ने लाने को।



देवा;नहीं और कुछ नही।

किरण;क्या नाम है तुम्हारा।

देवा;देवा नाम है मेरा।

किरण;बहुत अच्छा नाम है । मेरा नाम किरण है।

देवा;कोई और नहीं मिला तुम्हें।

करण;क्या मतलब।

देवा;मेरा मतलब तुम अच्छी तरह जानती हो।

किरण;क्या करू देवा। पति यहाँ रहता नहीं ससुर से कुछ होता नहीं बाहर गए तो ससुर की बदनामी होंगी इसीलिये जो तुमने देखा रोज़ बस यही होता है।
देवा;आगे बढ़ता है और किरण का हाथ पकड़ लेता है।


किरण;ये क्या कर रहे हो तुम।

देवा;चुप कर साली तू क्या है और क्या देख रही है मै अच्छी तरह से जानता हूँ।

किरण;जानते हो तो कुछ करते क्यों नही।

देवा;कोई ज़रुरत नही।

किरण;हँसते हुए लगता है तुम भी मेरे बापू की तरह हो इलाज करवा लो उनसे।

देवा;के बात दिमाग में चढ़ जाती है और वो किरण को पकड़ के दिवार से चिपका देता है।



देवा;साली मुझे नहीं पता था की वैध की बहु ऐसी है।

किरण;अभी देखा कहाँ है तुमने जो कह रहे हो की मै कैसी हूँ।

देवा;तो दिखा न कैसे है तेरा।
वो किरण को अपनी तरफ घुमा लेता है और उसके होठो पे अपने होंठ लगा देता है।

क़िरण;एक प्यासी चूत सुखी गाण्ड वाली मदमस्त औरत जो पिछले दो महिनो से आग में जल रही थी और हर रोज़ उसका ससुर उस आग में घी ड़ालने का काम कर रहा था।

वो देवा के होठो को अपने मुंह में ले के चबाने लगती है।



देवा;उसे मसलने लगता है पर तभी उसे शालु के पति का ख्याल आता है और वो किरण को अपने से अलग कर देता है।
मुझे अब चलना चाहिए।

किरण;ऐसे कैसे पहली मर्तबा मेरे घर आये हो मेरा चेहरा देखा है तुमने मुंह दिखाई तो दो।
वो नीचे बैठ जाती है और झट से देवा के पेंट खोल के नीचे गिरा देती है।
WOW KIRAN KA MAST ACTION
 
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देवा;का लंड तो ज़रा से हलचल से खड़ा हो जाता था
वो तैयार था।

और किरण उसे अपने मुंह में घुसाके सही रास्ता दिखा देटी है गलप्प गलप्प।

किरण; आहह इतना बड़ा तो मैंने आज तक नहीं देखा देवा आहह इसे एक दिन ज़रूर लुंगी गलप्प गलप्प आह्हह्हह्हह्हह।



देवा;आहह जल्दी कर आह्ह्ह्ह।

किरण;खीच खीच के देवा के लंड को चुसने लगती है आज कई दिनों बाद वो किसी मरद का लंड चूस रही थी।

देवा;किरण के बाल पकड़ के अपने लंड के झटके सटा सट उसके मुंह में देने लगता है और कुछ मिनट बाद ढेर सारा रस मलाई किरण के मुंह में उंडेल देता है।

किरण;बड़े चाव से वो मलाई खाने लगती है और देवा बाद में उसे मिलने का वादा करके वहां से निकल जाता है।

जब वैध को अपनी सभी समग्री मिल जाती है तो वो शालु के पति का इलाज शुरू कर देता है और सभी दवाइयाँ खिलाने के बाद वो उन्हे आराम करने की सलाह देके अपने घर चला जाता है।

रात हो चुकी थी। देवा सुबह से घर से बाहर था । शालु उसके इस मेंहनत की कायल हो चुकी थी। रश्मि अपने बापू के तबियत को ले के परेशान थी पर चोर नज़रो से वो भी देवा को देख ही लेती थी।

रात का खाना शालु के कहने पे देवा ने उनके साथ ही खाया।

जब सभी लोग घर के अंदर बैठे हुए थे तो शालु बाहर देवा के पास जाती है।

देवा;काकी अब मै चलता हूँ माँ राह देख रही होगी।

शालु;देवा के गले लग जाती है।
मै तेरा ये एहसान कैसे चुकाऊँगी देवा तूने आज जो कुछ किया है वो मै कभी नहीं भूल सकती।
WOW MAST POST
 
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देवा;काकी मैंने जो किया वो मेरा फ़र्ज़ था आप अपना मन हल्का मत करो।

शालु;तू कतना अच्छा है देवा और मै तुझे क्या समझती थी।



देवा;के हाथ अचानक शालु के कमर पे चले जाते है और वो ना चाहते हुए भी शालु के कमर को हल्का सा दबा देता है । शायद किरण ने जो लंड चुसी थी उसी का ये असर था की अब औरत के पास आते ही उसके हाथ अपने आप हरकत करने लगते थे।

पर इस बार शालु कुछ नहीं कहती।
ये बोलके वो देवा के सीने पे ज़ोर से चुमटी काट लेती है बदमाश कहीं का।

रश्मी;माँ यहाँ आओ बापु को होश आ गया है।

शालु;अंदर चली जाती है और देवा अपने घर के तरफ।

आज का पूरा दिन पप्पू के बाप के तीमारदारी में निकल गया था वैसे भी देवा कल रात सोच चूका था की वो अब हवेली नहीं जायेगा।

पर उसके नसीब में कुछ और ही लिखा हुआ था।

वो जब घर जा रहा था तो उसे रास्ते में पदमा मिलती है और वो देवा को बताती है की जागिरदार साहब ने उसे कल सुबह हवेली पे बुलाया है।

वो बड़े जल्दी में लग रही थी।

देवा भी थक चूका था इसलिए वो भी कुछ ख़ास ध्यान पदमा पे ना देते हुए घर चला जाता है।
WOW NICE UPDATE
 
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गोली की आवाज़ सुनके पेड़ पे बैठे सारे परिन्दे उड़ जाते है और देवा की गाण्ड फट जाती है।वो हिम्मत राव की बात अच्छी तरह समझ गया था।

देवा;मालिक आगे से आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगा।

हिम्मत राव;;देवा को ज़हरीली नज़रो से घुरते हुए हवेली के अंदर चला जाता है।

उसके जाने के बाद देवा चैन की साँस लेता है।

कुछ देर बाद रानी बाहर आती है वो आज भी क़यामत ढा रही थी ।

देवा;उसे देखता ही रह जाता है पर अगले ही पल वो बन्दूक देवा के ऑखों के सामने घुम जाते है।

रानी;कुछ पीयोगे देवा।

देवा;नहीं मालकिन चलिये

रानी;नाचते कुदते कार में जाके बैठ जाती है।

कार उस सुनसान रास्ते पे चलने लगती है कुछ देर बाद रानी देवा को कार रोकने के लिए कहती है कार के रुकते ही रानी अपनी जगह से उठके देवा की गोद में जाके बैठ जाती है।

देवा;मालकिन ये आप क्या कर रही है यहाँ नहीं वहां बैठिए ना।

रानी;ओह्ह देवा मेरे देवा तुम कल कहाँ रह गए थे। तुम्हें पता है एक दिन तुम्हें नहीं देखती तो मेरे दिल को चैन नहीं आता ।

देवा;मालकिन ये आप कैसे बहकी बहकी बातें कर रही है। आप मालकिन है हमारे मै आपका नौकर हूँ।

रानी;नौकर हो न मेरे तुम । जो मै कहूँगी करोगे ना।

देवा: जी मलकीन।

रानी;मुझे गाल पे चुमो।

देवा;नहीं मालकिन ये मुझसे नहीं होगा।

रानी;ठीक है तो मै तुम्हारे मालिक से कह दूंगी की तुम....

देवा;झट से परी के गाल पे छोटी सी किस कर देता है और पीछे हट जाता है।
YE KYA HUA KUCHH AAGE NAHI NIKAL GAYE
 
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देवा बहुत थक चूका था इसलिए वो सीधा बिस्तर पकडता है और कुछ देर में उसकी आँख भी लग जाती है।

सुबह देवा जल्दी उठके सबसे पहले खेत में चला जाता है कल पूरा दिन वो खेत में नहीं गया था मज़दूरों को काम समझाके वो कुंवे पे बैठा कुछ सोच रहा था।

उसे रह रह के बस एक बात परेशान कर रही थी की वो हवेली जाये या न जाए।अगर नहीं जायेंगा तो जागिरदार नाराज़ हो जाएंगे और अगर गया तो रानी उसे फिर से परेशान करेगी।।वो रानी से किसी भी तरह पीछा छुड़ाना चाहता था।
बैठे बैठाये कौन मुसीबत मोल लेना पसंद करता है।

आखीर कर वो कुछ फैसला करते हुए हवेली की तरफ चल देता है जब वो वहां पहुँचता है तो हिम्मत राव को गार्डन में बैठा पाता है।

हिम्मत राव एक कुरसी पे बैठा हुआ था और सामने के टेबल पे दो बन्दूकें रखे हुई थी जिसे हिम्मत राव साफ़ कर रहा था।

देवा की तो हालत ख़राब होने लगती है इतने खतरनाक बन्दूकें देख के वो ड़रते ड़रते हिम्मत राव के पास आता है।

नमस्ते मालिक आपने मुझे याद किये थे।

हिम्मत राव;देवा बैठो बैठो।

देवा;नहीं मालिक मै यही ठीक हूँ।

हिम्मत राव;तुम कल क्यों नहीं आये थे और रानी मुझे बता रही थी की तुम उसे ठीक से कार चलाना नहीं सिखा रहे हो।

देव ;हकलाने लगता है नहीं नहीं मालिक मै तो छोटी मालकिन को बिलकुल अच्छे से कार चलना सिखा रहा हुं और वो कल शालु काकी के पति की तबियत ख़राब हो गई थी इस लिए मै नहीं आ पाया।

हिम्मत राव;वो बड़े वाली बन्दूक उठाके देवा के सर की तरफ निशाना लगा के देखने लगता है।
बहुत खूबसूरत चीज़ है ये देवा एक बार चल जाये तो जान निकाल के छोड़ती है।
तूम्हे कैसे लगे ये।

देवा;बहुत अच्छे है मालिक।

हिम्मत राव;देखो देवा रानी मेरी एकलौती बेटी है उसकी ख़ुशी मेरी ख़ुशी है और उसकी नाराज़गी मतलब मेरी नाराज़गी।

हिम्मत राव ये कहते हुए ऊपर हवा में फायर करता है।
YES YE HUI NA BAAT ISKE BAAD WALA UPDATE PEHLE DAAL DIYE THE
 
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रानी;ऐसे नहीं हम्म एक काम करो मुझे होठो पे चुमो।

देवा;नहीं न छोटी मालकिन।

रानी;जल्दी और अभी वरना......

देवा;न चाहते हुए भी उस आग के कुंवे में गिरता चला जा रहा था । जिससे आज तक कोई ज़िंदा वापस नहीं आया था।

वो रानी के होठो को अपने मुंह में लेके चुसने लगता है
रानी सिसकारियां भरने लगती है और देवा का हाथ पकड़ के अपनी दोनों ब्रैस्ट पे रख देती है।

देवा;हलके हलके ब्रैस्ट दबाते हुए रानी को किस करने लगता है तकरीबन 10 मिनट तक रानी देवा को अपने से अलग नहीं होने देती।।

देवा;अपने होंठ जब रानी के होठो से अलग करता है तो उसके जिस्म में एक बदलाव महसूस करता है वो रानी को चुमने से तो मना कर रहा था पर इस सबसे उसका लंड पेंट के अंदर पूरी तरह खड़ा हो गया था।

और वो रानी को चुभ भी रहा था । रानी अपने सीट पे बैठ जाती है और मुस्कुराते हुए देवा की तरफ देखने लगती है।

देवा;घर चले मालकिन।

रानी;मालकिन के बच्चे नखरे तो बड़े दिखा रहा था और ये तेरे पेंट में क्या है जो मुझे चूभ रहा था । बता मुझे देखने दे कही चाकू तो नहीं छुपा रखा है मुझे मारने के लिये।

देवा;शर्म के मारे पानी पानी हुआ पड़ा था वो क्या बोलता की मालकिन ये मेरा लंड है जो आपके चूत पे रगड खा रहा था।

रानी;आगे बढ़ती है और देवा का पेंट खोल देती है देवा मना करता रह जाता है पर ज़िद्दी रानी किसकी सुनती थी जो वो देवा की बात मानती।

रानी;बाप रे ये क्या है रे।



रानी के हाथ में देवा का चमकता हुआ तेज़ धार वाला लंड आ जाता है उसके लंड के सुपाडे पे दूधिया पानी के कुछ क़तरे चमक रहे थे जिसे रानी अपनी ऊँगली से वापस देवा के लंड पे मल देती है।
WOW YAHA TO KHARBUJA APNE AAP CHHURI PE GIRNE JA RAHA HAI MAST POST
 
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रानी;तू तो बड़ा कमीना निकला मालकिन पे डोरे ड़ालता है अभी तेरी खबर लेती हूँ।
वो दोनों हाथो में देवा के लंड को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगती है।

देवा की नज़रें रानी के आधे नंगे ब्रैस्ट पे टीक जाती है
और जिस्म ऐठने लगता है रानी के नाज़ुक हाथ देवा के लंड पे कहर बरपा रहे थे। वो इतनी अदा से लंड को मुठिया रही थी की देवा कुछ देर बाद ही पानी छोड़ने लगता है

आह मालकिन आहह नहीं ये पाप है मालकिन ऐसा मत करो आहह आह।

रानी के दोनों हाथ देवा के लंड से निकले पानी से भर चुके थे।
वो देवा की ऑखों में देखते हुए अपनी उँगलियों को एक एक करके चाटने लगती है।

देवा :ये आप क्या कर रही है मालकिन ये गन्दा है।

रानी;प्यार करती हूँ तुझसे और प्यार में कुछ गन्दा नहीं होता।

देवा ख़ामोशी से रानी को देखने लगता है। रानी के इस हरकत से उसके दिल में भी प्यार का एक छोटा सा दिया जगमगाने लगा था।

रानी;देवा को घर चलने के लिए कहता है और देवा मुस्कराता हुआ हवेली की तरफ कार दौड़ा देता है।

हवेली पहुंच के रानी देवा का हाथ पकड़ के अपने रूम में ले जाती है।

देवा;मना करता जाता है पर रानी उसकी एक नहीं सुनती।

रूम में पहुँच के रानी दरवाज़ा बंद कर देती है।

देवा;छोटी मालकिन मुझे बहुत डर लग रहा है आप दरवाज़ा तो खोल दो वरना किसी ने हमें ऐसे देख लिया तो क्या समझेगा।

रानी;देवा के गले में बाहें डाल देती है।
मेरी आँखों में देखो इस में सिर्फ प्यार है देवा। ढेर सारा प्यार और जानते हो ये किसके लिए है।तुम्हारे लिए तो जब तक तुम मेरे साथ हो कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड सकता।


देवा;पर मालकिन।

रानी;देवा के शब्द पूरे नहीं होने देती और एक बार फिर से उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगती है।गल्पप गलप्प।

रानी;देवा ज़रा मेरे काँधे तो दबा दो बहुत दर्द कर रहा है।

देवा;क्या करता नौकर जो था जो मालिक कहेंगे वो नौकर करेगा।

वो रानी के बिस्तर पे बैठ के उसके काँधे दबाने लगता है।

रानी; अच्छा एक बात बता । मै तुझे अच्छी लगती हूँ न सच सच बोलना तुझे मेरी कसम है देवा।

देवा;मालकिन आप बहुत खूबसूरत हो । आपके जैसी लड़की मैंने आज तक नहीं देखा। पर मालकिन मै आपसे प्यार नहीं करता। आप आसमानो में उड़ने वाली परी हो और मै ठहरा ज़मीन का एक कीडा।आपका और मेरा कोई मेंल नहीं है मालकिन।

रानी के दिल में आज पहली बार कुछ हुआ था वो देवा को कुछ कुछ जानने लगी थी।

अच्छा वो सब छोड़ ये बता तुझे कैसी लड़की पसंद है।

देवा;मालकिन आप भी न मुझे शर्म आती है।

रानी;हाय मेरे शरमीले तू क़ितना बड़ा बेशरम है मै अच्छी तरह जान चुकी हूँ।

देवा; मालकिन।

हिम्मत राव;रानी कहाँ हो तुम यहाँ आओ।
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दोनो हिम्मत राव की आवाज़ सुनके अपने बात बीच में बंद कर देते है । देवा की गण्ड फिर से फ़टने लगती है और वो रानी को कल आने का कह के पीछे के दरवाज़े से घर की तरफ निकल जाता है।


वो जब घर पहुँचता है तो पप्पू उसे उसका इंतज़ार करता हुआ मिलता है वो देवा को बताता है की वैध जी के यहां से दवा लाना है।

देवा;पप्पू से कहता है की वो दवा ला देगा।
पप्पू घर चला जाता है।देवा खाना खाके कुछ देर आराम करके अपने खेत में चला जाता है।

उसका दिमाग चारो तरफ घुम रहा था कभी उसे पदमा याद आती तो कभी रानी।
और वैध जी के घर जाने का सोच के किरण।

वो बेहद खुश था एक वक़्त ऐसा था की वो पप्पू के गाण्ड से काम चला रहा था और अब वो वक़्त आ गया था की हर तरफ हरियाली ही हरियाली नज़र आ रही थी।

वो अपना ट्रेक्टर लेके वैध जी के घर की तरफ निकल जाता है रस्ते में उसे पदमा मिलती है।

पदमा;कहाँ जा रहा है देवा।


पदमा के नशीली ऑखें देवा को साफ़ साफ़ बता रही थी की पदमा क्या चाहती है कहाँ कहाँ और कितना चाहती है।
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पदमा की नशीली ऑखें देवा को साफ़ साफ़ बता रही थी की वो क्या चाहती है।

देवा;क्या बात है काकी आज तो क़यामत ढा रही हो।

पदमा;चोली को ठीक करते हुए ।
क्या करूँ जिस मुये पे दिल आया है वो दिन रात बस काम करता रहता है।
आम सामने पड़े है और अँगूर ढूँढ़ता रहता है।

देवा;चल आजा बैठ जा ट्रेक्टर में।

पदमा;खुश हो जाती है और झट से ट्रेक्टर में बैठ जाती है।
कही खेत में तो ले जाने का मन तो नहीं है तेरा।

देवा;पहले वैध से दवाये लेते है उसके बाद देखेंगे ।

और देवा ट्रेक्टर को वैध के घर की तरफ मोड देता है।

रास्ते भर पदमा अपनी जवानी देवा को दिखाती रही और बीच बीच में देवा के लंड को पेंट के ऊपर से सहलाती रही।
जीसकी वजह से देवा का लंड ऐसे खड़ा हुआ की बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

वैध जी का घर भी आ जाता है पर देवा का लंड सोने को तैयार नहीं था।

पदमा;हँसते हुए देवा के लंड की तरफ ईशारे करते हुए कहती है।
ज़रा इस मुये को थोडी देर सुला दे वरना कही वैध ने देख लिया तो सारे गांव में तेरे हथियार के बारे में बोल देगा।

देवा;साली तेरी वजह से इसका ये हाल हुआ है । जितना दबाता हूँ उतना खड़ा हो जाता है।
वो वैध जी के घर का दरवाज़ा खटखटाता है।

कुछ देर बाद किरण छोटे से चोली घागरा पहने बाहर आती है।
देवा पे जब उसकी नज़र पडती है तो चोली के छोटे छोटे कसी हुए रसियां और ज़्यादा कसती चली जाती है।

चुचे सामने की तरफ चोली को धकेलने लगते है।
WOW MAST POST
 

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